21वीं शताब्दी की कविता पर एक नयी किताब
नयी सदी की कविता – गणेश पाण्डेय
“इन कवियों के भीतर अनन्त ऊर्जा का स्रोत छुपा हुआ है,इनके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है, किसी मठाधीश का जर्जर आशीर्वाद भी नहीं”
‘नयी सदी की कविता’ कवि, कथाकार और आलोचक गणेश पाण्डेय की नयी किताब है. इस किताब में हिन्दी में इस समय लिख रहे बिलकुल युवा और नये पचास कवियों की कविताओं का सिलसिलेवार अध्ययन प्रस्तुत किया गया है.
इन कवियों में शामिल हैं : महेश पुनेठा, शहंशाह आलम, प्रेमचन्द गाँधी, पंकज पराशर, रामजी तिवारी, रति सक्सेना, वन्दना देव शुक्ला, रश्मि भारद्वाज, सुदीप सोहनी, अरविन्द कुमार, समीर कुमार पाण्डेय, नित्यानन्द गायेन, कमलजीत चौधरी, स्वप्निल श्रीवास्तव, इत्यादि.
इन कवियों के बारे में स्वयं लेखक गणेश पाण्डेय का कहना है कि “ये कवि महाबली नहीं हैं, लेकिन मठाधीशों की परिक्रमा करने वाले कमजोर कवि भी नहीं हैं. ये छोटे कवि अपने भीतर अनन्त ऊर्जा का स्रोत छुपाये हुए कवि के स्वाभिमान और साहस की प्रतिमूर्ति हैं.ये कवि नाम और इनाम की खातिर अपना मान-सम्मान गिरवी रखने वाले कवि नहीं हैं. ये चाँद और दूसरे ग्रहों की सतह से छलाँग लगा सकते हैं, क्योंकि इनके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है, यहाँ तक कि किसी मठाधीश का जर्जर आशीर्वाद भी नहीं.”
सनद के मुताबिक 13 जुलाई 1955 को तेतरी बाजार, सिद्धार्थनगर (तत्कालीन जनपद
बस्ती) में जन्म। आरम्भिक शिक्षा वहीं और आसपास। किशोर
जीवन से ही साहित्य में गहरी दिलचस्पी। उच्चशिक्षा के लिए गोरखपुर आगमन। गोरखपुर
विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए. की उपाधि हासिल और यहीं से ‘आठवें दशक की हिन्दी कहानी में ग्रामीण जीवन’ विषय पर डॉक्टरेट। जीविका की शुरुआत में कुछ वक्त पत्रकारिता से सम्बद्ध। कुछ समय उद्योग विभाग में
सहायक प्रबन्धक के रूप में सरकारी नौकरी। सन् 1987 में गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्राध्यापक के रूप में
नियुक्ति, तब से यहीं। सम्प्रति प्रोफेसर के पद पर
कार्यरत। विश्वविद्यालय में पूर्व अधिष्ठाता छात्रकल्याण और शिक्षक राजनीति में
लोकतान्त्रिक मूल्यों के लिए लम्बे संघर्ष के फलस्वरूप यूनिवर्सिटी टीचर्स
एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में भी योगदान। साहित्यिक पत्रिका ‘यात्रा’ का सम्पादन। इंटरनेट पर ब्लॉग।
प्रकाशित कृतियाँ: अटा पड़ा था दुख का हाट, जल में, जापानी बुखार, परिणीता (कविता संग्रह); अथ ऊदल कथा, रीफ (उपन्यास); पीली पत्तियाँ (कहानी संग्रह); रचना, आलोचना और पत्राकारिता, आलोचना का सच (आलोचना); आठवें दशक की हिन्दी
कहानी (शोध)।
‘नयी सदी की कविता’ के लिए इस लिंक पर जाएँ -
http://www.vaniprakashan.in/details.php?prod_id=7943&title=Nayee%20Sadi%20Kee%20Kavita
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